Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 51, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
कालेनामलतां याते वितते तस्य चेतसि ।
बलादवततारान्तर्ज्ञानमात्मप्रसादजम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
समय आने पर रागादि दोषों से शून्य हुए उनके विशाल चित्तमें प्रतिबन्ध का क्षय
होने पर पूर्वजन्म में किये गये शास्त्रश्रवण आदि के संस्कार के उद्बुद्ध होने से अन्तःकरण की निर्मलता
से उत्पन्न होनेवाला ज्ञान उत्पन्न हुआ