Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 51, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 51, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
तत्रासौ दश वर्षाणि मनसैवायजत्सुरान् ।
गवाश्वनरमेधाद्यैर्यज्ञैर्विपुलदक्षिणैः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर
उन्होंने दस वर्षो तक गोमेघ, नरमेघ, अश्वमेघ आदि विपुल दक्षिणावाले यज्ञ से देवताओं की मन से
ही आराधना की