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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 52, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । कदाचिदथ मार्गेण तेन कैलासवासिनीम् । अहं स्नातुमदृश्यात्मा व्योमवीथीगतोऽगमम् ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, इसके बाद कभी आकाशमार्ग में स्थित और अदृश्यरूप से मैं उसी मार्ग से जिसमें दाशूर का कदम्ब वृक्ष पडता था, केलासवासिनी मन्दाकिनी में स्नान करने के लिए गया

सर्ग सन्दर्भ

इक्यावनवाँ सर्ग समाप्त बावनवाँ सर्ग संकल्प से कल्पित विश्व मिथ्या ही है यह सूचित करने की इच्छा से खोत्थराजा चरित की कल्पना करके वर्णन |