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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 52, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

निर्गत्य नभसः सप्तमुनिमण्डलकोटरात् । रात्रौ प्राप्तोऽस्मि सुमते दाशूरतरुमुन्नतम् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

हे सुबुद्धे, मेँ आकाश से, जिसका कि सप्तर्षिमण्डल एक भाग है निकलकर रात्रि में ऊँचे दाशूर के कदम्ब वृक्ष के पास पहुँचा