Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 52, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
यावच्छृणोमि विटपकुहरात्कानने वचः ।
कुड्मलाम्भोजलग्नस्य षट्पदस्येव निःस्वनम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
मैंने जंगल में शाखाओं के खोखले से मुकुलित कमलके
अन्दर बैठे हुए भवर की ध्वनि के समान सम्पूर्ण वचन सुना