Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 52, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
त्रयस्तस्य महाबाहो देहा विहरणक्षमाः ।
जगदाक्रम्य तिष्ठन्ति ह्युत्तमाधममध्यमाः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाबाहो, उसके सब व्यवहाररूपी क्रीडा करने में सक्षम, उत्तम, मध्यम ओर अधम, सात्विक,
राजस ओर तामस भेद से तीन प्रकार के शरीर जगत को आक्रान्त करके स्थित हैं