Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 52, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
भूताविष्ट इवावेगात्तत उत्थाय धावति ।
पुरं तदप्यथाप्नोति गन्धर्वैरिव निर्मितम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर वह भूताविष्ट की
तरह निद्रा आदि के आवेश से जाग्रद् देहादि के अभिमान का त्याग कर दौड़ता है, तदुपरान्त गन्धर्वनगर
के समान मिथ्याभूत उस नगर को प्राप्त होता है