Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 52, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 52, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
तस्येच्छा जायते पुत्र कदाचिच्चलचेतसः ।
विनाशं संप्रयामीति तेनाशु स विनश्यति ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे पुत्र, चंचल चित्तवाले उसकी कभी संकल्प के
लय की अवस्थारूप सुषप्ति को प्राप्त होऊँ, ऐसी इच्छा उत्पन्न होती है, उससे वह शीघ्र विनष्ट हो
जाता है