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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 53, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

मायया रचितास्तेषु संकल्पेन महामते । अहङ्कारमहायक्षाः परमालोकभीरवः ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

हे महामते, उन देहरूपी मध्यगृहों मे संकल्प ने माया से अहंकाररूपी महायक्षो की रचना रच रक्खी है । वे परमात्मा के दर्शन से भयभीत होते हैं, तात्पर्य यह है कि परमात्मा के दर्शन से हृदयग्रन्थिरूप अहंकार का विनाश सुना जाता है, अतएव वे परमात्मा के दर्शन से उरते हैं