Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 53, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
देहापवरकेष्वन्तर्महाहङ्कारयक्षकैः ।
सह संक्रीडतेऽत्यर्थं स सदैवासदुत्थितैः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
देहरूपी मध्यगृहों के अन्दर अहंकाररूपी महायक्ष, जो कि माया
से उत्पन्न हुए हैं उनके साथ वह सदा खूब क्रीडा करता है