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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 53, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

दाशूर उवाच । शृणु पुत्र यथाभूतमेतत्ते कथयाम्यहम् । येन संसारचक्रस्य तत्त्वमस्यावबुध्यसे ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

दाशूर ने कहा : हे पुत्र, सुनो, यथार्थ यह मैं तुमसे कहता हूँ, जिससे तुम इस संसारचक्र के तत्त्व को जान जाओगे