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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 53, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

क्व भविष्यति निर्माणं वर्तमाने क्व गम्यता । उभयार्थविरुद्धत्वान्मन्मोहाय वचस्तव ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

विरुद्ध होने के कारण आपका वचन मेरे मोह के लिए हो रहा हे