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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 53, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 53, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

परमान्नभसो जातः संकल्पः खोत्थ उच्यते । जायते स्वयमेवासौ स्वयमेव विलीयते ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

परमाकाश से उत्पन्न हुआ संकल्प खोत्थ कहा जाता है, वह अपने संकल्प से उत्पन्न प्रवृत्ति की वासना के प्रादुर्भाव से ही उत्पन्न होता है और निवृत्तिवासना की दढता से स्वयं विलीन हो जाता है