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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 54, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

पुष्पाक्रान्तौ करस्पन्दयत्नः पुत्रोपयुज्यते । तदप्युपकरोत्यस्मिन्न संकल्पपरिक्षये ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

हे पुत्र, फूल को मसलने के लिए हाथ की चेष्टारूप यत्न का उपयोग होता है, लेकिन इस संकल्पविनाश में उतने भी यत्न का उपयोग नहीं है