Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 54, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
संकल्पो येन हन्तव्यस्तेन भावविपर्ययात् ।
अप्यर्धेन निमेषेण लीलयैव निहन्यते ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस पुरुष को संकल्प का विनाश करना हो, वह भावना के अस्मरण से
आधे पलक में ही अनायास उसका विनाश कर डालता है