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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 54, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

संकल्पेनैव संकल्पं मनसा स्वमनो मुने । छित्त्वा स्वात्मनि तिष्ठ त्वं किमेतावति दुष्करम् ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मननशील पुत्र, संकल्प से ही संकल्प का ओर मन से ही अपने मन का उच्छेद करो यानी असंकल्पन के संकल्प से ही सब पदार्थो के संकल्प का ओर आत्मतत्व मननरूप मन से ही अपने मन का उच्छेद करके तुम स्वात्मनिष्ठ हो जाओ, ऐसा करने में कौन-सी कठिनाई हे ?