Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 54, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
सत्यास्थायामसत्यां तु किंनिष्ठा वासना भवेत् ।
भावनाक्षयतः सिद्धिस्ततः प्राप्यं न शिष्यते ।
तस्मादसदिदं सर्वं विज्ञेयं हेलयेद्धया ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए भावना के उच्छेद को चाहनेवाले पुरुष को सबसे पहले जगत मिथ्या है, ऐसा ज्ञान प्राप्त
करना चाहिये, यह कहते हैं।
(जगत में “यह सत्य है" इस विश्वास के न होने पर भावना किसमें रहेगी ?) भावना के नाश से
सिद्धि प्राप्त होती हे । तदनन्तर प्राप्तव्य कुछ वस्तु अवशिष्ट नहीं रहती हे । इसलिए अभ्यासवश दृढ
हुए दुश्य के अनादर से इस समस्त जगत को असत् समझना चाहिये