Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 54, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
तनुभावनया तेन सुखदुःखैर्न लिप्यते ।
अवस्त्विति च निर्णीय स्नेहास्था न प्रवर्तते ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
पुरुष दृश्य के अनादर से
देह में आत्मत्व को अनुसन्धानवश होनेवाले सुखदुःखों से लिप्त नहीं होता । देहसम्बन्धी पुत्र, मित्र
आदि भी अवास्तविक हैं, यह जानकर उनमें स्नेह से आदर नहीं होता हे