Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 54, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
आस्थाक्षये न जायेते हर्षामर्षौ भवाभवौ ।
तस्मादसदिदं सर्वं सुखदुःखादिविभ्रमैः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
आदर का अभाव होने
पर हर्ष, क्रोध तथा जन्म-मरण आदि नहीं होते हैं, इसलिए सुख, दुःख आदि की भ्रान्तियों से युक्त यह
सब असत् ही हे