Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 54, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
वासनावलितं लोके स्फुरच्छक्ति मनः स्थितम् ।
करोति स्वाशयेनेमां व्यवस्थां मलिनश्चलः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
कैसे पूर्वोक्त रीति से परिवर्तन करता हुआ स्फुरित होता है ? उस पर कहते हैं।
लोक में मन विषयों के सम्बन्ध से तत्-तत् विषयवासनाओं से आवृत और अधिष्ठानरूप चित् के
सम्बन्ध से स्फुरण शक्तिवाला होकर स्थित हे, इसलिए मलिन और चंचल होकर अपनी इच्छा से
पूर्वोक्त रचना आदि की व्यवस्था करता है