Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 54, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
भावयन्ती चितिश्चेत्यं व्यतिरिक्तमिवात्मनः ।
संकल्पतामुपायाति बीजमङ्कुरतामिव ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
विषयों की अपने से अतिरिक्त की तरह भावना करता हुआ चेतन जैसे बीज अंकुरता को प्राप्त
होता हे वैसे ही संकल्परूपता को प्राप्त होता है