Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 54, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 54, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
असत्यमेव जातस्त्वमसत्यमपि वर्तसे ।
अस्मिञ्ज्ञाते च विज्ञाने ह्यसत्यं संविलीयते ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
असत्य ही तुम उत्पन्न हुए हो ओर असत्य ही स्थित
हो, मेरे इस उपदेशरूप शास्त्र के ज्ञात होने पर असत्य का विलय हो जाता हे