Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 55, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
प्रालेयकणपद्धत्या मुक्तावल्याभ्यलंकृतम् ।
सर्वावयवमेवाच्छपुष्पपूरैः प्रपूरितम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
हिमकणों की पंक्तिरूपी मुक्तावली से वह
अलंकृत था । निर्मल फूलों के समूह से उसका सर्वाग भरा हुआ था