Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 55, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
स्वरेणुचन्दनालेपैः समालब्धमखण्डितम् ।
स्वच्छदाभोगविपुलरक्ताम्बरपरिच्छदम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने परागरूपी चन्दन के
लेप से वह जड से लकेर चोटी तक लिप्त था और अपने पल्लवो के विस्तार से प्रचुर एवं लाल रंग के
धोती, दुपट्टा, अंगरखा, पगड़ी आदि से युक्त था