Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 55, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
विवाहायेव वेषेण पुष्पभारातिभारिणा ।
लताङ्गनानुषक्तेन नागरेण कृतोपमम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
मानों विवाह के लिए पुष्पों के भार से भरे हुए,
लतारूपी अंगना से संयुक्त उसने नागरिक वेष से अपनी उपमा कर रक्खी थी