Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 55, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
मुनिबद्धोटजाकारलतामण्डपमण्डितम् ।
मञ्जरीभिः पताकाभिर्युक्तं पुरमहोत्सवे ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनियों से बनाई
हुई पर्णशालाओं के आकार के तुल्य लतामण्डपों से वह विभूषित था तथा महोत्सव के समय पताकाओं
से सुशोभित नगर के समान वह मंजरियो से सुशोभित था