Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 55, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
मृगकण्डूयनध्वस्तपुष्पधूलिविधूसरम् ।
प्रोत्सारितोपान्तवनं वृषमल्लमिवोत्थितम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
मृगो के खुजलाने से उत्पन्न कम्पसे
गिरी हुई पुष्पधुनियों से वह धूसरित था अपने विस्तार के आधिक्य से समीपवर्ती वन को उसने नीचा
दिखा दिया था, अतएव वह युद्ध के लिए उद्यत हुए बड़े श्रेष्ठ वृषभ के समान था