Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 55, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
बर्हिभिः कुसुमोद्वान्तपरागपरिपाटलैः ।
निक्षेपक्षिप्तसंध्याभ्रवालवालमिवाचलैः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
फूलों से गिरी
हुई पुष्पधूलियों से लाल हुए मयूरो से वह ऐसा प्रतीत होता था मानों पर्वतो ने सन्ध्याकालीन मेव खण्डो
के वच्चे-से अपने केश धरोहररूप से उसमें रख दिये हैं