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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 33

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 55, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

आवयोस्तत्र चित्राभिः कथाभिरितरेतरम् । शर्वरी सा व्यतीयाय मुहूर्त इव कान्तयोः ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

हम दोनों की आपस की विविध कथाओं से वह रात्रि इस प्रकार मुहूर्त की भाँति व्यतीत हुई, जैसे कि प्रेमयुक्त नायक-नायिकाओं की परस्पर की विविध कथाओं से रात्रि मुहूर्त की भाँति बीत जाती है