Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 55, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
दाशूराख्यायिकैषा ते कथिता रघुनन्दन ।
जगतः प्रतिबिम्बाभा सत्याकाराप्यसन्मयी ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे रघुनन्दन, यह दाशूर की आख्यायिका, जो सत्य-सी होती हुई भी जगत के
प्रतिबिम्ब की तरह असन्मयी है, मैंने आपसे कही