Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 55, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
दाशूराख्यायिकेवेयमित्येतत्कथितं मया ।
तुभ्यं राघव बोधाय जगद्रूपनिरूपणे ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, जगत स्वरूप के निरूपण के सिलसिले में यह जगत दाशूर की आख्यायिका के
तुल्य है, यह मैंने बोध के लिए आपसे कहा