Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 55, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
तस्मादवास्तवीं त्यक्त्वा वास्तवीमपि रञ्जनाम् ।
दाशूरसिद्धान्तदृशा सदोदारो भवात्मवान् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए ज्ञानी की दृष्टि से अवास्तविक, अज्ञानी की
दृष्टि से चाहे यह वास्तविक ही क्यों न हो, इस जगत में अहं-मम इत्यादि आस्था का त्याग करके दाशूर
से उपदिष्ट सिद्धान्त के अनुसार उदार दुष्टिवाले आप सदा आत्मवान होड्ये