Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 55, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 55, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
तस्माद्विकल्पं मलमात्मनस्त्वं निर्धूय पश्यामलमात्मतत्त्वम् ।
आसादयिष्यस्यचिरात्पदं तद्भविष्यसीज्यो भुवनेषु येन ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए विकल्प,
उसके आश्रयरूप मन और उसके हेतुभूत अज्ञान को दूर करके आप निर्मल आत्मतत्त्व का दर्शन कीजिए।
शीघ्र उस उत्तम पद को आप प्राप्त होंगे, जिसकी प्राप्ति से तीनों भुवनो में आप पूज्य हो जायेंगे