Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 56, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
अतः स्वात्मनि कर्तृत्वमकर्तृत्वं च संस्थितम् ।
निरिच्छत्वादकर्तासौ कर्ता संनिधिमात्रतः ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए आत्मा में कर्तृत्व और अकर्तृत्व भी स्थित है, क्योंकि इच्छा रहित होने के कारण
वह अकर्ता है और सन्निधिमात्र से कर्ता है