Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 56, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
द्वे एवात्मनि विद्येते कर्तृताकर्तृतानघ ।
ययैव पश्यसि श्रेयस्तामाश्रित्य स्थिरो भव ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे पापरहित श्रीरामचन्द्रजी, आत्मा में कर्तृत्व और अकर्तृत्व दोनों ही विद्यमान है, जिससे
आप अपना कल्याण देखें, उसका अवलम्बन करके स्थिर होइये