Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 56, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 56, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
सर्वस्थोऽहमकर्तेति दृढभावनयानया ।
प्रवाहपतितं कार्यं कुर्वन्नपि न लिप्यते ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं सबमें स्थित ओर अकर्ता
हूँ, इस दृढ भावना द्वारा प्रवाह से प्राप्त हुए कार्यो को करता हुआ भी पुरुष पुण्य-पाप से लिप्त नहीं
होता