Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 57, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 57, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
एतदर्थमबुद्धीनां यन्महासमरक्रियाः ।
तन्मन्ये राम धिक्कार्यं द्वन्द्वलक्षक्षयावहम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
राज्यादि सुख युद्ध आदि अनर्थो द्वारा लाखो योद्धाओं के क्षय का कारण होता है, इसलिए दयालू
तत्त्वज्ञानी द्वारा वह धिक्कार के योग्य ही है, सत्कार के योग्य नहीं है ऐसा कहते हैँ ।
हे श्रीरामचन्द्रजी, जिसके लिए अज्ञानी लोगों की महायुद्धादि क्रियाएँ होती हैं लाखों योद्धाओं के
विनाश हेतु उस राज्य सुख को मैं धिक्कार के योग्य समझता हूँ