Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 57, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 57, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
कल्पमात्रेण कालेन सुमहापेलवोदरे ।
तस्मिन्नपि हि यो नाशः सर्वाधिरमहाधियाम् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई शंका करे कि महाकल्प तक चिरकाल भोगने योग्य ब्रह्मा के पद में (हिरण्यगर्भपद में) :
उसकी रति होगी ? इस पर नहीं, ऐसा कहते हैं।
द्विपरार्ध अवधिवाले महाकल्पान्तरूप काल से नष्ट होने के कारण अत्यन्त कोमल उस पद में भी
सब प्राणियों की प्रलय का निमित्त होने के कारण मानस व्यथा का निमित्तभूत नाश होता हे, अतः वह
पद मूढो का ही स्पृहणीय है, तत्त्वज्ञानियों का स्पृहणीय नहीं हैं