Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 57, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 57, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
वनमालामृगा मुग्धाः पुरसंचारसंस्थितौ ।
बालबुद्धिविनोदाय योजिताश्चर्मपुत्रिकाः ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार संसाररूपी देह के विवेक से शून्य, वनपंक्तियों की मृगरूपी मांस की पुतलियाँ,
जिनके अन्दर जीव प्रविष्ट है, अपनी अपनी मूढ़बुद्धियों के भोगरूप किसलयों (कोंपलों) के ग्रास से
विनोद करने के लिए तत्भोगभूमिरूप नगर संचार में ब्रह्मा द्वारा नियोजित हैं