Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 58, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 58, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
सबाह्याभ्यन्तरे देहे अधश्चोर्ध्वं च दिक्षु च ।
इत आत्मा ततश्चात्मा नास्त्यनात्ममयं क्वचित् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
भी हे : "आत्मेवाऽधस्तादात्मोपरिष्टादात्मा पश्चादात्मा पुरस्तादात्मा दक्षिणत आत्मोत्तरत आत्मेवेदं
सर्वम्"