Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 58, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 58, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
यन्नाम नाम तत्किंचित्सर्वमेवाहमान्तरः ।
आपूरितापारनभाः सर्वत्र सन्मयः स्थितः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
जो चेतनरूप से प्रसिद्ध है ओर जो अचेतनरूप से प्रसिद्ध है, वह सब सन्मय, अपार आकाश को
पूर्ण करनेवाला आत्मरूप में सर्वत्र स्थित हूँ