Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 58, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 58, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
पूर्णस्तिष्ठामि मोदात्मा सुखमेकार्णवोपमः ।
इत्येवं भावयंस्तत्र कनकाचलकुञ्जके ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
आनन्दरूप एकमात्र सागर के तुल्य में सर्वत्र सुखपूर्वक स्थित हूँ, इस प्रकार मेरु पर्वत के निकुंज में
भावना करते हुए वे स्थित रहे