Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 59, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
तं शरीरं मनस्तस्मिंस्ततस्तेजसि भास्वरे ।
आत्माकारसमाकारं भास्वरं समकल्पयत् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
उस तेज में अपने सदृश दूसरी मूर्ति की कल्पना द्वारा हिरण्यगर्भ का प्रवेश कहते हैं।
तेजोमण्डल की सृष्टि करने के अनन्तर चतुर्मुख शरीराकार से स्थित पूर्वोक्त मनने उस चमकीले
तेजो सें दैदीप्यमान, पुराण आदि में प्रसिद्ध अपने आकारके तुल्य शरीर की कल्पना की