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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 59, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

ज्वलज्जटाभारधरोपान्तविस्फारपावकः । ज्वालाविशालावयवः पूरिताकाशमण्डलः ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

उसके चारों ओर जल रही ज्वालाओं की पंक्तियों को धारण करनेवाली धधकती हुई अग्नियाँ हैं और वह ज्वालाओं से विशालकाय है एवं उसने उक्त विशाल अवयवों से आकाशमण्डल को पूर्ण कर रक्खा है