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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verses 32–33

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 59, verses 32–33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

संकल्पवशतः सर्वाः प्रसवन्ति जगत्क्रियाः । संकल्पवशतो देवा निर्यान्ति नियतिस्थिताः ॥ ३२ ॥ कोपितायाः प्रजानाथैर्जगत्सृष्टेः कुलोद्भवः । ब्रह्मा संचिन्तयत्येष पद्मासनगतः प्रभुः ॥ ३३ ॥

हिन्दी अर्थ

संकल्प से ही सब जगत की क्रियाएँ उत्पन्न होती हैं और संकल्पवश ही नियति के अधीन देवतालोग उत्पन्न होते हैं