Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 59, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
विचारयति संसारं सुखदुःखसमन्वितम् ।
आशापाशशतैर्बद्धं रागद्वेषभयातुरम् ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
तब वे सुख-दुख से युक्त सैकड़ों आशापाशों से बंधे हुए, राग, द्वेष ओर भय से पीड़ित
संसार का विचार करते हैं