Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 59, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 59, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
ध्यानात्कदाचिद्भगवान्स्वयं विरमति प्रभुः ।
बन्धनात्सलिलस्यन्दात्सौम्यत्वादिव वारिधिः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
किसी समय एकाकार वृत्ति की धारणा में आग्रहरूप
ध्यान से भगवान ब्रह्मा स्वयं ऐसे विरत होते हैं, जैसे जल की निश्चलतारूप सौम्यता से समुद्र विरत
होता है