Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 6, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
पुष्पकेसरनीहारपटवासरणोत्सुकैः ।
लताङ्गनागणैर्व्याप्तमिदं तन्नन्दनं वनम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
फूलों, केसरो
ओर हिम तथा मकरन्द के कणों ओर वस्त्रों को सुगन्धित करनेवाले परागं से जो एक दूसरे से परस्पर
ताडनरूप संग्राम है,उसमें आसक्त लताओं ओर अंगनाओं से व्याप्त यह नन्दनवन हे