Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 6, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
कान्तगीतरवानन्दप्रनर्तितसुराङ्गनौ ।
इमौ तौ वल्लकीस्निग्धस्वरौ नारदतुम्बुरू ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
सुन्दर
गान की ध्वनि से आनन्दपूर्वक देवांगनाओं को नचानेवाले वीणा के समान मधुर स्वरवाले ये नारद ओर
तुम्बरु ऋषि हैं