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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 6, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 6, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

मदमन्मथमत्ताङ्ग्य इमास्ताः सुरयोषितः । देवेश्वरं निषेवन्ते वनं वनलता इव ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

मद से उत्पन्न कामदेव से मत्त अंगवाली ये देवांगनाएँ जैसे वनलताएँ वन की सेवा करती हैं वैसे ही देवराज इन्द्र की सेवा कर रही हैं